Friday, June 21, 2024
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जानिए कैसे इसरो ने टाटा और गोदरेज के साथ मिलकर चंद्रयान 3 मिशन को दिया अंजाम?

दरअसल, चंद्रयान 3 मिशन के इस इतिहास को बनाने के लिए इसरो ने जो दिन-रात मेहनत की है उसके पीछे भारत की कई ऐसी कंपनियां भी इसमें शामिल हुईं, जिन्होंने इस अभियान में बहुत बड़ा योगदान दिया.

चंद्रयान 3 चांद पर सफलतापूर्वक उतर गया है, भारत ने इतिहास रच दिया है. विक्रम लैंडर और ग्रुप ने शाम 6:05 बजे चंद्रमा पर चंद्रयान की सफल सॉफ्ट लैंडिंग कराई है। जहाँ पूरे देश की निगाहें इस ऐतिहासिक मिशन पर टिकी थीं. वहीँ स्पेसएक्स (Space X) के प्रमुख एलन मस्क ने भी भारत को बधाई दी है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मिशन को सफल बनाने में इसरो (ISRO) के अहम योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता.

दरअसल, इस इतिहास को बनाने के लिए इसरो ने जो दिन-रात मेहनत की है। तो वहीं इसके पीछे भारत की कई ऐसी कंपनियां भी इसमें शामिल हुईं, जिन्होंने इस अभियान में बड़ा योगदान दिया. भारत के इस मिशन को सफल बनाने में इस क्षेत्र की कई कंपनियों ने योगदान दिया है। विशेष रूप से, रतन टाटा की टाटा स्टील और भारत के सबसे पुराने समूह गोदरेज समूह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आइए जानें कि टाटा और गोदरेज ग्रुप ने इस मिशन को सफल बनाने में कैसे और किस तरह से योगदान दिया।

टाटा स्टील का चंद्रयान 3 मिशन में योगदान

जैसा कि हमने आपको बताया चंद्रयान 3 मिशन को सफल बनाने में रतन टाटा की कंपनी टाटा स्टील (Tata Steel) ने अहम भूमिका निभाई रही है. रॉकेट में टाटा स्टील द्वारा निर्मित क्रेन का उपयोग किया गया था। जिनकी वजह से चाँद पर उड़ान भरी गयी थी। लॉन्च से पहले इसरो कंपनी ने एक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि टाटा का इस्तेमाल देश के इस मिशन में भी किया जा जा रहा है. टाटा स्टील (Tata Steel) द्वारा निर्मित एलवीएमथ्री फैट बॉय ने लॉन्च वाहन को असेंबल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टाटा स्टील ने जमशेदपुर में अपने संयंत्र (फैक्ट्री) में इसे बनाया है.

गोदरेज एयरोस्पेस ने अहम भूमिका निभाई

टाटा स्टील के अलावा, भारत के सबसे पुराने व्यापारिक घरानों में से एक गोदरेज एयरोस्पेस ने भी चंद्रयान 3 की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गोदरेज ग्रुप (Godrej Group) की अंतरिक्ष शाखा, गोदरेज एयरोस्पेस ने चंद्रयान 3 के लिए प्रोपल्शन इंजन, सैटेलाइट थ्रस्टर्स का उत्पादन किया। कंपनी ने इसका निर्माण मुंबई के पास स्थित प्लांट में किया है। इंजन और थ्रस्टर्स के अलावा, गोदरेज एयरोस्पेस ने इस मिशन के लिए L110 इंजन भी बनाया है।

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