Friday, June 21, 2024
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Godfather of AI Geoffrey Hinton: इंसानों के खात्मे की वजह बन सकती है नई टेक्नोलॉजी

Godfather of AI Geoffrey Hinton: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गॉडफादर कहे जाने वाले ज्योफ्री हिन्टन ने एक बार फिर एआई को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। वे कहते हैं कि वे एआई को लेकर परेशान हैं क्योंकि यह नई तकनीक बहुत सी नौकरियों को छीनने का काम कर रही है। वे कहते हैं कि आय असमानता (income inequality) के प्रभावों से निपटने की जिम्मेदारी एआई के संदर्भ में सरकार के कंधों पर होगी।

Godfather of AI Geoffrey Hinton: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गॉडफादर कहे जाने वाले ज्योफ्री हिन्टन ने एक बार फिर एआई को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। वे कहते हैं कि वे एआई को लेकर परेशान हैं क्योंकि यह नई तकनीक बहुत सी नौकरियों को छीनने का काम कर रही है। वे कहते हैं कि आय असमानता (income inequality) के प्रभावों से निपटने की जिम्मेदारी एआई के संदर्भ में सरकार के कंधों पर होगी।

एआई की मदद से अमीर और ज्यादा अमीर होंगे। मालूम हो कि, ज्योफ्री हिंटन (Geoffrey Hinton) बीते साल गूगल यूनिट में काम कर रहे थे। वे AI को लेकर अपने बयानों के कारण चर्चा में आए थे।

Godfather of AI Geoffrey Hinton: इंसानों के खात्मे की वजह बन सकती है नई AI टेक्नोलॉजी

हिंटन ने कहा था कि एआई के साथ प्रोडक्टिविटी और पैसा बढ़ेगा, लेकिन यह पैसा अमीर लोगों के पास जाएगा। इसके साथ ही एआई की वजह से लोगों की नौकरियां खत्म हो जाएंगी और यह समाज के लिए बहुत बुरा साबित होगा।

सभी को मिले एक तय सैलरी

हिंटन ने एआई को लेकर कहा है कि सरकारों को एक यूनिवर्सल बेसिक इनकम सेट करनी चाहिए, यानी सरकार हर व्यक्ति को बिना उनके संसाधनों की परवाह किए एक निश्चित बेसिक सैलरी दे। बीबीसी से बातचीत के दौरान हिंटन ने बताया कि डाउनिंग स्ट्रीट में लोगों ने मुझसे सलाह ली और मैंने उन्हें सलाह दी कि यूनिवर्सल बेसिक इनकम एक अच्छा विचार है।

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इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान होंगे चैटबॉट

इससे पहले हिंटन ने कहा था कि एआई चैटबॉट के खतरे भी डरावने हैं। उनके मुताबिक, आने वाले समय में चैटबॉट इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान साबित होंगे। इतना ही नहीं, इन चैटबॉट का इस्तेमाल गलत कामों में किए जाने की आशंका भी है।

इंसानों के गायब हो जाने का खतरा

वे कहते हैं कि मेरा अनुमान है कि अब से 5 से 20 वर्षों के बीच इस बात की आधी संभावना है कि हमें एआई की समस्या का सामना करना पड़ेगा। हिंटन के मुताबिक, नई तकनीक मनुष्यों के लिए “विलुप्त होने का खतरा” पैदा कर सकती है, क्योंकि उन्होंने “बुद्धिमत्ता का एक ऐसा रूप तैयार कर लिया है जो जैविक बुद्धि से कहीं बेहतर है। यह हमारे लिए बहुत चिंताजनक है”।

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